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सीमेंट से हथकरघा तक: जीएसटी ने छत्तीसगढ़ में समावेशी विकास को बढ़ावा दिया

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छत्तीसगढ़: तीव्र शहरीकरण और विकास के दौर से गुज़र रहे छत्तीसगढ़ में, दो प्रमुख क्षेत्र - सीमेंट उद्योग और हथकरघा क्षेत्र - राज्य की अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान कर रहे हैं और समावेशी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी दरों में की गई कटौती ने इन दोनों क्षेत्रों को एक नई गति दी है।

बुनियादी ढांचे का इंजन: सीमेंट उद्योग...

कोरबा, रायगढ़, बिलासपुर, रायपुर और नया रायपुर जैसे क्षेत्रों में सीमेंट और निर्माण सामग्री उद्योग की मजबूत उपस्थिति है। यह उद्योग राज्य के कर राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है और सहायक उद्योगों को समर्थन प्रदान करता है।

सीमेंट क्षेत्र की वृद्धि मुख्य रूप से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से प्रेरित है, जिसके परिणामस्वरूप क्षमता विस्तार हुआ है और रोजगार में वार्षिक रूप से \text{5-10} प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

जीएसटी का बड़ा असर देखने को मिला, सीमेंट पर जीएसटी को 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का दूरगामी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस कटौती ने सीमेंट को अधिक किफायती बना दिया है, जिससे निर्माण लागत कम हुई है। इसके परिणामस्वरूप, आवास की मांग को प्रोत्साहन मिला है और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।

सांस्कृतिक पहचान और आजीविका: हथकरघा क्षेत्र

सीमेंट जैसे संगठित क्षेत्र के साथ-साथ, छत्तीसगढ़ का हथकरघा और पावरलूम क्षेत्र राज्य के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने में गहराई से जुड़ा हुआ है। यह छत्तीसगढ़ के सबसे प्रमुख कुटीर उद्योगों में से एक है और देश के बड़े वस्त्र इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।जांजगीर-चांपा, रायगढ़, रायपुर, महासमुंद, बस्तर और सरगुजा जैसे जिले राज्य के हथकरघा नेटवर्क के गढ़ हैं। जांजगीर-चांपा और रायगढ़ का प्रसिद्ध टसर और कोसा रेशम, साथ ही रायपुर, दुर्ग, महासमुंद और बस्तर के सूती हथकरघा समूह, इस क्षेत्र की उत्कृष्ट कारीगरी को प्रदर्शित करते हैं। हथकरघा बुने हुए कपड़ों में विशेष रूप से टेरी टॉवलिंग और इसी तरह के बुने हुए टेरी कपड़े शामिल हैं।

ग्रामीण आजीविका का आधार: हथकरघा क्षेत्र लगभग \text{1.5 लाख} बुनकरों के लिए महत्वपूर्ण आजीविका प्रदान करता है। इनमें से कई महिलाएं हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत उत्पादन में लगी हुई हैं। यह क्षेत्र न केवल सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित कर रहा है, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त भी बना रहा है।

जीएसटी दरों में तर्कसंगतता और उद्योग को समर्थन देने वाले कदमों ने इन दोनों विपरीत क्षेत्रों - भारी उद्योग और कुटीर उद्योग - को मज़बूत किया है, जिससे छत्तीसगढ़ में सही मायने में समावेशी विकास को बढ़ावा मिला है।

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