रायपुर। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की योजनाओं को दीर्घकालीन और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को नवा रायपुर स्थित राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (RGNGWTRI) में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में उप मुख्यमंत्री एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव ने हर घर जल प्रमाणित गांवों की महिला सरपंचों को संबोधित करते हुए कहा कि जलापूर्ति योजनाओं के सफल संचालन के लिए जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन सबसे जरूरी है।
कार्यशाला का आयोजन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने यूनिसेफ और एक्शन फॉर कम्युनिटी डेवलपमेंट (ACE) के सहयोग से किया, जिसमें प्रदेशभर की करीब 100 महिला सरपंचों ने भाग लिया।
वर्षा जल संचयन और भूजल रिचार्ज पर दिया जोर
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि बारिश के पानी का संग्रह और जल स्रोतों का संरक्षण करने से भूजल स्तर बेहतर होगा और भविष्य में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी। उन्होंने ग्राम पंचायतों से स्टॉप डैम निर्माण, तालाबों के संरक्षण और प्राकृतिक जल प्रवाह में बाधा बनने वाले अतिक्रमण हटाने पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
पंचायतों को बनना होगा आत्मनिर्भर
अरुण साव ने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत योजनाएं पूरी होने और पंचायतों को हस्तांतरित होने के बाद उनके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होगी। इसके लिए ग्रामीणों की सहभागिता और पंचायतों की आत्मनिर्भर व्यवस्था आवश्यक है।
महिला सरपंचों ने साझा किए अनुभव
कार्यशाला में महिला सरपंचों ने अपनी पंचायतों में नल-जल योजनाओं के संचालन, रखरखाव, जल गुणवत्ता परीक्षण और रखरखाव शुल्क से जुड़े अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने भी जलापूर्ति योजनाओं के सफल और निर्बाध संचालन के लिए तकनीकी जानकारी और बेहतर प्रबंधन के उपाय बताए।
कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव मोहम्मद कैसर अब्दुलहक, संस्थान की निदेशक रूबी मुखर्जी, यूनिसेफ की जल एवं स्वच्छता विशेषज्ञ श्वेता पटनायक, प्रमुख अभियंता के.के. मरकाम और अधीक्षण अभियंता समीर गौड़ सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।