रायपुर। छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों के क्षेत्र में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है। राज्य में अब कोयला और लौह अयस्क के साथ-साथ लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों पर भी फोकस बढ़ रहा है। सरकार के अनुसार, अब तक नीलाम किए गए 65 खनिज ब्लॉकों से अगले 50 वर्षों में करीब ₹4 लाख करोड़ के राजस्व की संभावना है।
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख गैर-ईंधन खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य की एक खास पहचान टिन अयस्क के व्यावसायिक उत्पादन को लेकर भी है। वहीं, कोरबा के कटघोरा क्षेत्र में देश के पहले कमर्शियल लिथियम ब्लॉक को लेकर भी गतिविधियां आगे बढ़ रही हैं। लिथियम जैसे खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी और ऊर्जा भंडारण जैसी आधुनिक तकनीकों में किया जाता है।
राज्य की खनिज संपदा में टिन, लिथियम, ग्रेफाइट, वैनेडियम, निकेल, क्रोमियम, सोना, हीरा और बॉक्साइट जैसे खनिज शामिल हैं। दंतेवाड़ा और सुकमा में टिन, बलरामपुर में ग्रेफाइट-वैनेडियम, महासमुंद में निकेल-क्रोमियम और सोना तथा गरियाबंद में हीरे से जुड़े खनिज संसाधनों की संभावनाएं बताई गई हैं। इससे छत्तीसगढ़ की भूमिका रणनीतिक और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन में भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
खनन से मिलने वाले राजस्व का असर केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं है। खनन प्रभावित क्षेत्रों में जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य स्थानीय जरूरतों पर राशि खर्च की जाती है। केंद्र सरकार के अनुसार, खनन से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा राज्यों को प्राप्त होता है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को खनिज क्षेत्र से करीब ₹16,625 करोड़ का रिकॉर्ड राजस्व मिलने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में 65 खनिज ब्लॉकों से लंबे समय में अनुमानित ₹4 लाख करोड़ की संभावित आय राज्य के खनिज क्षेत्र के लिए बड़ी आर्थिक संभावना मानी जा रही है।