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Dairy Development News: देवभोग ब्रांड को राष्ट्रीय पहचान दिलाने पर जोर, दुग्ध किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक डेयरी व्यवस्था पर फोकस

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रायपुर, 3 सितंबर 2026। पशुधन विकास मंत्री रामविचार नेताम ने दुर्ग जिले के उरला (कुम्हारी) स्थित छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के देवभोग दुग्ध संयंत्र में आयोजित दुग्ध किसान सम्मेलन में शिरकत की। उन्होंने कहा कि देवभोग अपनी गुणवत्ता और शुद्धता के चलते उपभोक्ताओं के बीच विश्वास का प्रतीक बन चुका है। अब इसे देशभर में मजबूत ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने उरला दुग्ध संयंत्र की नवीन कैंटीन का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने संयंत्र की विभिन्न प्रणालियों का निरीक्षण कर वहां की कार्यप्रणाली और उत्पादन व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों से डेयरी क्षेत्र से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया।

पशुपालकों के लिए मार्गदर्शिका का विमोचन

सम्मेलन में पशुपालकों के लिए तैयार की गई विशेष मार्गदर्शिका पुस्तिकाओं का विमोचन किया गया। इसके अलावा देवभोग के रेडियो जिंगल, रिंगटोन और प्रेरक गीत भी जारी किए गए। सरकार का लक्ष्य डेयरी क्षेत्र को आधुनिक, आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाकर किसानों एवं पशुपालकों की आय बढ़ाना है।

दुग्ध उत्पादकों के हितों को प्राथमिकता

रामविचार नेताम ने कहा कि पशुपालन को ग्रामीण परिवारों के लिए मजबूत आजीविका का माध्यम बनाने के लिए दुग्ध संग्रहण, प्रसंस्करण, विपणन नेटवर्क और तकनीकी सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि दुग्ध उत्पादकों और किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए डेयरी विकास से जुड़ी योजनाओं को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारा जाए।

उन्होंने कहा कि देवभोग को देशभर में गुणवत्ता और विश्वास के प्रतीक के रूप में स्थापित करने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक उत्पादन व्यवस्था, बेहतर मार्केटिंग नेटवर्क और किसानों की भागीदारी को मजबूत किया जाएगा। इससे दुग्ध उत्पादक किसानों की आय बढ़ाने के साथ उनकी आत्मनिर्भरता और आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करने में मदद मिलेगी।

किसान और महिला पशुपालकों की मौजूदगी

दुग्ध किसान सम्मेलन में पशु चिकित्सा सेवाओं के संचालक चंद्रकांत वर्मा, दुग्ध महासंघ के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में दुग्ध उत्पादक किसान और महिला पशुपालक मौजूद रहे।

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