रायपुर, 6 अगस्त। प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की अर्हता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के अनुसार, स्कूलों में कार्यरत ऐसे सभी शिक्षकों को, जिन्होंने अब तक शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें 31 अगस्त 2028 तक अनिवार्य रूप से TET (Teacher Eligibility Test) पास करना होगा। इस समय-सीमा के भीतर परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों की पदोन्नति रोक दी जाएगी और उनकी नौकरी पर भी संकट आ सकता है।
छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे समय पर शिक्षक पात्रता परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित करें, ताकि कार्यरत शिक्षकों को अर्हता हासिल करने का पर्याप्त अवसर मिल सके। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख से स्पष्ट है कि अब विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता और मानक से कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा निर्धारित कट-ऑफ तिथि के बाद केवल टेट-उत्तीर्ण शिक्षक ही सेवाओं में बने रहने या अगली पदोन्नति के पात्र होंगे।
इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ सहित देशभर के गैर-टेट (Non-TET) कार्यरत शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। शिक्षक संगठनों ने राज्य शासन से मांग की है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के परिपालन में तत्काल शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने का शेड्यूल जारी किया जाए। इसके साथ ही कार्यरत शिक्षकों के लिए विशेष मार्गदर्शन व प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की भी मांग उठने लगी है, ताकि वे समय रहते इस परीक्षा को पास कर अपनी सेवाएं सुरक्षित कर सकें।