लाडनू (राजस्थान)। श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता आचार्य भिक्षु के 301वें जन्मोत्सव के शुभ अवसर पर राजस्थान के लाडनू में एक ऐतिहासिक व युगांतकारी निर्णय लिया गया। धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता युगप्रधान आचार्य महाश्रमण ने 550 साधु-साध्वी और समण-समणियों की उपस्थिति में मुख्यमुनि महावीर कुमार को युवाचार्य पद पर नियुक्त करने की घोषणा की। 270 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई अखण्ड आचार्य परंपरा, मर्यादा और साधना की दिव्य धारा को एक समर्थ और संस्कारित उत्तराधिकारी सौंपने का यह पल तेरापंथ धर्मसंघ के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया है।
समर्पण और साधना के प्रतीक नव-नियुक्त युवाचार्य महावीर कुमार का व्यक्तित्व सरलता, विनम्रता, गंभीर अध्ययन, उत्कृष्ट प्रवचन-कौशल और अनुशासित साधना का अद्भुत संगम है। उन्होंने अपने साधु जीवन में ज्ञान, ध्यान, सेवा और संतुलित नेतृत्व का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया है, जिसने साधु-साध्वी समाज के साथ-साथ लाखों श्रावक-श्राविकाओं के हृदय में विशेष स्थान बनाया है। मुख्यमुनि के रूप में उन्होंने सदैव संघ की मर्यादाओं का संरक्षण करते हुए कुशल मार्गदर्शन प्रदान किया है, जो उन्हें इस दायित्व के लिए पूर्णतः उपयुक्त बनाता है।
भविष्य की दूरदर्शिता का प्रमाण देते हुए आचार्य महाश्रमण का यह निर्णय संपूर्ण जैन समाज में नव ऊर्जा, विश्वास और प्रसन्नता का संचार लेकर आया है। संघ से जुड़े श्रद्धालुओं ने परम पूज्य गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए नव-नियुक्त युवाचार्य महावीर कुमार के यशस्वी एवं प्रेरणादायी नेतृत्व के लिए मंगलकामनाएं की हैं। सभी ने प्रार्थना की है कि उनके पावन सानिध्य में तेरापंथ धर्मसंघ साधना, शिक्षा, संस्कार और मानवता के पथ पर निरंतर नई ऊंचाइयों को प्राप्त करता रहे।