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1024 अर्घ्य अर्पण और पूर्णाहुति हवन के साथ संपन्न हुआ सिद्ध चक्र महामंडल विधान; कचना के मुनि सुब्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुआ आयोजन

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28 जुलाई 2026। रायपुर के अमलतास केसल, कचना स्थित 1008 श्री मुनि सुब्रत नाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे आठ दिवसीय अनादि सिद्ध 'श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान' का भव्य समापन हुआ। मंदिर समिति के अध्यक्ष हिमांशु जैन के अनुसार यह धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान और भक्तिभाव के साथ संपन्न कराया गया।

1024 विशेष अर्घ्य और पूर्णाहुति हवन

विधान के अंतिम दिवस सहस्त्र नामावली के वाचन के साथ 1024 विशेष अर्घ्य समर्पित किए गए। इसके उपरांत विश्व शांति और जन-कल्याण की भावना के साथ पूर्णाहुति हवन संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में जैन समाज के धर्मावलंबियों ने आहुतियां दीं।

विधान की धार्मिक मान्यता:

विधिकारक सुरेश मोदी ने बताया कि सिद्ध चक्र महामंडल विधान प्रतिवर्ष कार्तिक, फाल्गुन और आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ किया जाता है। हुंडासर्पिणी काल में यह विधान महासती मैना सुंदरी और कोटिभट्ट श्रीपाल के निमित्त से प्रसिद्ध हुआ। मैना सुंदरी ने अपने अटूट विश्वास और सिद्ध यंत्र के अभिषेक जल (गंधोदक) के प्रभाव से अपने पति श्रीपाल का कुष्ठ रोग दूर किया था।

श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया धर्म लाभ

आठ दिनों तक चले इस अनुष्ठान के दौरान प्रतिदिन धार्मिक क्रियाएं, अभिषेक, शांतिधारा और भक्ति संगीत का आयोजन हुआ, जिसमें पूरे शहर से श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पुण्यार्जन किया।

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