रायपुर। पंचशील नगर निवासी विजय संचेती ने एक माह का मासखमन तप पूर्ण किया है। जैन समाज में विशेष महत्व रखने वाली इस तपस्या के प्रति उनकी निरंतर साधना और समर्पण ने समाज के लोगों को प्रेरित किया है। संचेती ने नेपाल केसरी एवं राष्ट्र संत मणिभद्र मुनि के आशीर्वाद से इस वर्ष अपना 33वां मासखमन पूर्ण किया।
विजय संचेती पिछले 32 वर्षों से लगातार मासखमन की तपस्या करते आ रहे हैं। जैन समाज में मासखमन को कठिन और विशिष्ट तप माना जाता है। इस दौरान साधक निर्धारित अवधि तक अन्न एवं अन्य खाद्य पदार्थों का त्याग करते हुए तपस्या करता है। लगातार 33 वर्षों तक इस साधना को जारी रखना उनके आत्मसंयम, अनुशासन और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
समाज के वरिष्ठ सदस्य विनय पटवा ने बताया कि विजय संचेती की निरंतर साधना धार्मिक आस्था और आत्मसंयम का उदाहरण है। उनकी तपस्या से समाज के अन्य लोगों को भी संयम, त्याग और आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने बताया कि 33वें मासखमन का पारणा 22 अगस्त 2026, शनिवार को कुम्हारी स्थित जैन तीर्थ कैवल्य धाम में आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम सुबह 11:30 बजे से दोपहर 12:15 बजे के बीच परम पूज्य राजेश श्री जी म. सा. आदि ठाणा के सान्निध्य में होगा।
इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालु और गणमान्य सदस्य उपस्थित होकर विजय संचेती का अभिनंदन करेंगे तथा उनकी तपस्या की अनुमोदना करेंगे। लगातार 33 वर्षों से जारी उनकी साधना को समाज में धार्मिक अनुशासन और समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।है।