बिलासपुर, 12 अगस्त 2026 : शासकीय सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के लिए उच्च शिक्षा और छुट्टियों के नियमों को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक बेहद अहम और स्पष्ट निर्णय सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि जो कर्मचारी एक बार अध्ययन अवकाश (स्टडी लीव) का लाभ उठा चुके हैं, वे दोबारा असाधारण अवकाश या अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) पाने का कोई कानूनी अधिकार या दावा प्रस्तुत नहीं कर सकते।
उच्च न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि शासकीय सेवाओं में अनुशासन और विभागीय कार्यों की निरंतरता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। बार-बार लंबी छुट्टियों या अध्ययन अवकाश की अनुमति देने से सरकारी काम-काज प्रभावित होता है, जिससे आम जनता को मिलने वाली प्रशासनिक सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न होता है।
इस फैसले के बाद अब राज्य के विभिन्न विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को उच्च शिक्षा या अन्य पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दोबारा अवकाश मांगते समय नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। हाई कोर्ट के इस दो टूक निर्णय को प्रशासनिक व्यवस्था में कसावट लाने और सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।