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Smart Meter News: छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर के बाद क्यों बढ़ रहा बिजली बिल? 2-3 गुना बिल की शिकायतों के बीच समझें संभावित वजहें

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर का इस्तेमाल बढ़ने के साथ बिजली बिल को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें भी चर्चा में हैं। कई उपभोक्ताओं का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनका बिजली बिल पहले की तुलना में दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। इसे लेकर स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली, बिजली खपत की गणना और बिलिंग व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। शुरुआती तौर पर सरकारी विभागों के बकाया बिजली बिलों की वसूली और निगरानी के लिए प्री-पेड स्मार्ट मीटर की व्यवस्था का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद स्मार्ट मीटर योजना का दायरा घरेलू उपभोक्ताओं तक भी बढ़ाया गया है।

स्मार्ट मीटर से बिल बढ़ने की क्या वजह हो सकती है?

विशेषज्ञों के अनुसार केवल स्मार्ट मीटर लगने को बिजली बिल बढ़ने की एकमात्र वजह मानना सही नहीं होगा। बिल में बदलाव के पीछे वास्तविक बिजली खपत, मीटर रीडिंग की सटीकता, पुराने अनुमानित बिल, टैरिफ में बदलाव और उपभोक्ता की दैनिक बिजली खपत जैसे कई कारण हो सकते हैं।

स्मार्ट मीटर पारंपरिक मीटर की तुलना में बिजली खपत का डेटा अधिक नियमित तरीके से रिकॉर्ड करता है। ऐसे में पहले जहां मीटर रीडिंग अनुमान के आधार पर दर्ज होने की स्थिति बन सकती थी, वहीं स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत के आधार पर बिलिंग में अंतर दिखा सकता है। इसी वजह से कुछ उपभोक्ताओं को पुराने बिलों की तुलना में अचानक अधिक राशि दिखाई दे सकती है।

शिकायत होने पर क्या करें उपभोक्ता?

यदि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिल असामान्य रूप से बढ़ा है, तो उपभोक्ता को पहले पुराने और नए बिलों में यूनिट खपत, बिलिंग अवधि और लागू दरों की तुलना करनी चाहिए। केवल कुल बिल राशि देखने के बजाय यह देखना जरूरी है कि वास्तव में कितनी यूनिट बिजली दर्ज हुई है।

अगर मीटर की रीडिंग या बिल में गड़बड़ी की आशंका हो तो उपभोक्ता संबंधित बिजली वितरण कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकता है और मीटर की जांच की मांग कर सकता है। बिल बढ़ने की वास्तविक वजह सामने आने के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि समस्या अधिक खपत, बिलिंग प्रक्रिया या मीटर से संबंधित है।

स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच सबसे जरूरी बात यह है कि उपभोक्ताओं को बिलिंग प्रक्रिया और मीटर रीडिंग की स्पष्ट जानकारी मिले। पारदर्शी जांच और शिकायतों के समय पर निराकरण से स्मार्ट मीटर को लेकर बनी आशंकाओं को दूर किया जा सकता है।

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